रमापति,
मुरली वाले, केशव, माधव,
मधुसूदन,
दयानिधि, दुःख हरने वाले,
लक्ष्मीकांत, पंकजलोचन,
पद्मनाभ, राधा के श्याम,
कुञ्जबिहारी, मनमोहन,
पार्थ सारथी, त्रिविक्रम,
सब नाम तुम्हारे
सम्मोहन।
सुमेध, सुरेशम, रूप विशेषम,
चक्र सुदर्शन-धारी,
द्वारिकाधीश, नटवर नागर,
रास रचैया, बनवारी,
मुकुंद, मुरारी, योगीश्वर,
सांवरिया, तुम गिरधारी,
श्रीकांत, तुम श्रीश्रेष्ठ,
गोविन्द, गोकुल अघहारी।।
हे
वैकुण्ठनाथ, उर के
प्राण, नैय्या हमारी जलधि,
तारो।
देवकीनंदन, हे बृजनंदन,
इस भक्त का वंदन
स्वीकारो।।
कभी न पले हमारे
मन में, द्वेष, दम्भ,
छल, निम्न भाव।
हों स्वच्छ निर्मल सब के मन, आचार शुद्ध, सरल स्वभाव।।
करुणा दया हृदय बसे,
मिट जाए मन से
स्वार्थ भाव।
खुशी से रहें सभी
नारी नर, सौहार्द
का न हो अभाव।।
श्याम,
कृष्ण, मोहन मेरे, सदा
रहो तुम साथ।
कभी कुपथ पग न
धरूँ, चलो पकड़ कर
हाथ।।
मन से मैं लेता रहूं,
सदा श्याम का नाम।
श्याम नाम में बस रहे,
सब तीरथ सब धाम।।

No comments:
Post a Comment