Sunday, September 12, 2021

समर्पण

 

जिनसे पाकर जीवन मैंने, अब तक देखे कई वसंत।
समर्पित उनको यह काव्य-फल, करता हूँ प्रणाम अनंत।।

फिर जीवन के एक वसंत में, हे साथी! जब तुम आये।
कर पूर्ण मुझे, जीवन जीने के अर्थ नए तुमने सिखलाये।।

नीर, ये काव्य-धन संग तुम ही लाये मैं ऐसा जानता हूँ।
मुस्कान तुम्हारी सुख-वृष्टि, तुम्हे अपना भाग्य मानता हूँ।।

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